ट्विन टावर ब्लास्ट पास से देखने पर क्यों लगाई गई रोक?


ट्विन टावर ध्वस्त : फोटो; सोशल मीडिया

ट्विन टावर ध्वस्त : फोटो; सोशल मीडिया



By 0 Posted on: 28/08/2022

उत्तर प्रदेश के नोएडा में आज ट्विन टावर को ब्लास्ट कर इसे ध्वस्त कर दिया गया, ट्विन टावर को ध्वस्त करने से पहले ही अधिकारियों ने एहतियात बरतते हुए ट्विन टावर के आसपास की इमारतों और इलाके को खाली करा दिया था। ट्विन टावर के करीब 500 मीटर दूर तक क्षेत्र में लोगों के रहने पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। बिल्डिंग के आसपास के इलाके को खाली कराने का फैसला अधिकारीयों ने इसलिए किया था जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी न हो। बता दें कि ट्विन टावर के आसपास सुरक्षा सुनिश्चित इसलिए की गई थी जिससे लोगों को गंभीर चोट या धूल और धुएं से होने वाली अन्य किसी परेशानी से बचाया जा सके। आपको बता दें दुनिया में अब तक जितनी भी जगहों पर हाई-राइज ब्लास्ट के जरिए इमारतें गिराई गई हैं, उन सभी जगहों पर इसी तरह के एतहतियात बरते गए थे। आखिर ऐसे मामलो में इतनी एहतियात क्यों बरती जाती है? तब आपको बता दें इसकी एक वजह है, 25 वर्ष पूर्व ऑस्ट्रेलिया में एक घटना हुई थी। ऑस्ट्रेलिया में एक बिल्डिंग को ध्वस्त किया जाना था और बिल्डिंग ब्लास्ट को देखने के लिए स्थानीय लोग इकठ्ठा हो गए थे और आसपास इकट्ठा हुए स्थानीय लोगों को ब्लॉस्ट के दौरान चोटें आई थीं और एक 12 वर्षीय बच्ची की मौत भी हो गई थी। 

1997 में हुआ था हादसा

जब भी किसी ऊंची इमारत को ब्लास्ट के जरिए गिराया जाता है तब ब्लास्ट के दौरान आमतौर पर उसके आसपास का इलाका पूरी तरह से खाली करा दिया जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में जुलाई 1997 में जब एक अवैध अस्पताल को ब्लास्ट के जरिए गिराया जाना था तब अधिकारी भीड़ को रोकने में नाकाम हो गए थे। बिल्डिंग को गिरते देखने के लिए हजारों की भीड़ जुट गई थी और इसका नतीजा यह रहा कि इमारत के जमींदोज होने के बाद इसके मलबे की चपेट में आकर 9 लोग बुरी तरह घायल हो आगे जबकि एक 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई थी। तब मीडिया रिपोर्ट्स में अफसरों के हवाले से यह दावा किया गया था कि जिस कंपनी को इमारत गिराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसने वादा किया था कि बिल्डिंग का मलबा ब्लास्ट की जगह से 50 कदम से ज्यादा आगे तक नहीं जाएगा। इसी को देखते हुए इमारत के आसपास सिर्फ 200 मीटर का क्षेत्र ही खाली कराया गया था, लेकिन मलबे की चपेट में आने से जिस लड़की की मौत हुई थी वह इमारत से 400 कदम दूर थी।

Edited By: Ekagra Gupta