यौन उत्पीड़न के खिलाफ उठाए आवाज़ ले इन कानूनों का सहारा


उत्पीड़न

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By Nikita Mishra Posted on: 20/10/2022

देश में महिलाओं की संख्या कुल आबादी की  आधी है , लेकिन अगर रेप  के मामलो की बात की जाये तो प्रत्येक दिन देश में 87 से ज्यादा  महिलाए  यौन उत्पीड़न का शिकार होती है यह तो वो आंकड़े है जो दर्ज किये जाते है ,और कुछ ऐसे भी आंकड़े है जिनकी आवाज़े घर से  बाहर  भी नहीं जा पाती ,कुछ ऐसी धारणाओं को लेकर जो सदियों से समाज में चलता आ रहा है। शर्मिंदगी को लेकर या फिर समाज क्या कहेगा इनसब की वजह से उन महिलाओ की आवाज़ कही   न कहीं  दब  कर रह जाती है। आज ऐसी ही कई धाराएं हम आपको बताएँगे जिसके मदद से आप इन सभी आरोपों के खिलाफ आवाज़ उठा सकेंगे। 

:आपको बता दे की यदि कोई महिला कंपनी अथॉरिटी की वजह से यौन शोषण की शिकार होती है तो डरने की बात नहीं है , साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा  वर्कप्लेस पर होने वाले यौन-उत्पीड़न के खिलाफ 'विशाखा गाइडलाइंस' जारी की थी , जिसके अंदर आप आपके साथ हो रही अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठा सकती है। ऐसे ही कई कानून है जिसमे आपकी बातो को गुप्त रख आपकी मदद की जायेगी। 


:धारा 498 A  के तहत यदि कोई महिला ससुराल और पति द्वारा ,यौन उत्पीड़न का शिकार होती है तो इसके हिसाब से वो उनके खिलाफ आवाज़ उठा सकती है। साथ ही आरोपी को काम से काम 3 साल की सज़ा सुनाई जाएगी। 


: यदि किसी महिला के साथ बलात्कार हुआ है या फिर किसी भी प्रकार की कोई ज़ोर ज़बरदस्ती हुई हो तो सेक्शन 376 के तहत वो शख्स को कानून की नज़र में अपराधी समझा जाएगा साथ उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जायेगी। 


: यदि किसी नाबालिक लड़की के साथ बलात्कार हुआ हो तो उस आरोपी को सेक्शन 376DB के तहत आजीवन कारावास होगी।