हैवानियत और दरिंदगी की हदें पार करने वाले हैं ये तीन केस, जानें क्या हुआ उस दिन


These three cases are going to cross the limits of brutality

These three cases are going to cross the limits of brutality



By Vanshika Posted on: 17/11/2022

श्रद्धा मर्डर केस से आज पूरा देश सन हो चुका है लेकिन क्या आपको पता है भारत देश में इससे पहले भी कुछ भयंकर कैसे आ चुके हैं। जिसे सुन कर हर कोई हैरान हो गया और यह सोचने पर मजबुर हो  गया की क्या ऐसे इंसान भी दुनिया में मौजूद है। पहला केस है अनुपमा गुलाटी हत्याकांड जो 17 अक्टूबर 2010  को हुआ था। श्रद्धा मर्डर केस ने एक बार फिर देहरादून के चर्चित अनुपमा गुलाटी के हत्याकांड की यादों को ताजा कर दिया। दरअसल, 2010 में एक ऐसी वारदात हुई, जिसने पूरे देहरादून ही नहीं देश को भी झकझोर कर रख दिया था। 17 अक्टूबर 2010 को अनुपमा के पति राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। सिर्फ इतना ही नही दरिंदगी की हदें पार करते हुए राजेश ने शव के करीब 72 टुकड़े कर डीप फ्रीजर में रख दिए थे। वही अपनी बहन का कोई हाल चाल न मिलने पर जब अनुपमा का भाई सूरज 12 दिसंबर 2010 को दिल्ली से देहरादून पहुंचा तो इस हत्याकांड का खुलासा हुआ।

दूसरा केस

दूसरा,  केसबेलारानी दत्ता मर्डर केस 31 जनवरी 1954 कोलकाता में एक स्वीपर को टॉयलेट के पास अखबार में लिपटा पैकेट मिला। उसने अखबार पर खून के छींटे दिखे और पैकेट से निकली इंसानी अंगुली भी देखी।  पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दरएसल, बीरेन नाम के एक युवक का बेलारानी और मीरा नाम की महिलाओं से संबंध था। मिलने में देरी होती तो दोनों महिलाएं उससे सवाल पूछती थीं और बीरेन परेशान हो जाता। इन सब के बीच ही बेलारानी ने बीरेन को बताया कि वह प्रेग्नेंट है। परेशान बीरेन ने गुस्से में बेलारानी को मार डाला और उसके शरीर को टुकड़ों में काट डाला।  बीरेन ने घर की आलमारी में शरीर के टुकड़ों को रख दिया और दो दिन तक सोता रहा। बाद में बेलारानी के शरीर के टुकड़ों को उसने शहर के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया।  मामले में दोषी पाए जाने के बाद बीरेन को फांसी की सजा दी गई थी।

तीसरा केस

वही आखरी केस नैना साहनी हत्याकांड/तंदूर कांड  2 जुलाई 1995 में यूथ कांग्रेस के पूर्व नेता सुशील ने अपनी पत्नीद नैना को किसी से फोन पर बात करते हुए देखा। सुशील को देखते ही नैना ने फोन काट दिया और सुशील ने वही नंबर डायल किया तो दूसरी तरफ उसका सहपाठी करीम मतबूल था। इससे गुस्साए सुशील ने नैना साहनी की हत्या कर दी और उसकी लाश के टुकड़े कर अपने ही रेस्टोरेंट के तंदूर में जलाने लगा। इस काम में उसका रेस्टोरेंट मैनेजर भी उसकी मदद कर रहा था। लाश जलाने के दौरान तंदूर से आग की लपटें निकलते देख बाहर सब्जी बेचने वाली औरत चीख उठी और पेट्रोलिंग कर रहे पुलिस वालों के सामने पूरे मामले का पर्दाफाश किया। पुलिस पहुंची तो नैना की लाश बुरी तरह जली हुई फर्श पर पड़ी हुई थी।