भर्ती घोटाले के बाद मदरसों का सर्वे और तबादलों पर राजनीति




By 0 Posted on: 20/09/2022

उत्तराखंड: भर्ती घोटाले के बाद मदरसों का सर्वे और तबादलों पर राजनीति! 

उत्तराखंड के चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक के मौन कांडा प्राथमिक विद्यालय में जर्जर शौचालय ढह जाने से तीसरी क्लास में पढ़ने वाले मासूम छात्र की मौत और पांच अन्य छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद आखिर इस मामले में शिक्षा विभाग की नींद टूटी और वह जर्जर हो चुके विद्यालय भवनों, शौचालयों सूची तैयार कर रहा है। कहा जा रहा है कि सूची मिलने के बाद इन जर्जर हो चुके विद्यालय भवनों पर शासन के आदेश के बाद तोड़ने या मरम्मत की कार्रवाई की जाएगी।

इधर, उत्तराखण्ड सरकार के मदरसों के सर्वे कराये जाने के आदेश के बाद योग गुरु स्वामी रामदेव ने बड़ा बयान दिया है। स्वामी रामदेव ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में कुछ लोग इस्लामिक उन्माद और गलत गतिविधियों के मंसूबे पाले बैठे थे। स्वामी रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड में आज से तीस साल पहले इस्लामिक उन्माद नहीं था लेकिन आज कुछ लोग कुत्सित तरीके से देवभूमि उत्तराखंड को इस्लामिक उन्माद और धर्म परिवर्तन करके दूषित करने का काम कर रहे हैं, जो निंदनीय है। 

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के बीच स्वामी रामदेव का ये बयान राजनीतिक रूप से मायने तो रखता ही है, साथ ही साथ उत्तराखंड सरकार की जनसमस्याओं पर ढीली पकड़ को भी उजागर करता है। धामी सरकार की समान नागरिक संहिता पर पहल के बाद मदरसों के सर्वे से ये बात स्पष्ट हो गई है कि भविष्य में भी उत्तराखंड का भाजपा की हिंदुत्व की प्रयोगशाला के रूप में उपयोग होता रहेगा।  

दरअसल, उत्तराखंड सरकार इन दिनों अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और विधानसभा भर्ती घोटालों से जूझ रही है। ताजा मामला शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल विधानसभा में बैकडोर एंट्री को लेकर पहले ही विवादों के घेरे में हैं। ऐसे में उन्होंने अचानक अपने विभाग में बड़े स्तर पर तबादला आदेश जारी कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि तबादला मामले में भाजपा को कुछ भी गलत नजर नहीं आ रहा। भाजपा मानना है कि तबादले मंत्रियों के विशेषाधिकार हैं और मंत्रालय के अधीन आने वाले विभागों में तबादले व स्थानांतरण कभी भी किए जा सकते हैं। 

साफ जाहिर है कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार जैसे जनपक्षीय मुद्दों पर न तो सरकार संजीदा है और न ही विपक्ष। अभी ये भी अभी तय नहीं है कि भर्ती घोटालों की जांच कब तक पूरी होगी। बेरोजगार अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। बीमारू स्वास्थ्य सेवाएं उचित इलाज की बाट जोह रही हैं। देखने की बात ये है कि आखिर राज्य की डबल इंजन सरकार कब तक इन मुद्दों का समाधान खोज पाती है।