भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिक है


उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता और सरकारी मदरसों के सर्वे की खबरों

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता और सरकारी मदरसों के सर्वे की खबरों



By 0 Posted on: 21/09/2022

भारतीय सेना और रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे अधिक जमीन का मालिक है वक्फ बोर्ड, जानिये कैसे काम करता है वक्फ बोर्ड 

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता और सरकारी मदरसों के सर्वे की खबरों के साथ वक्फ बोर्ड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वक्फ बोर्ड अपनी सम्पतियों के कारण भी चर्चा में रहा है। दरअसल वक्फ बोर्ड के पास भारतीय सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन है। वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियां हैं जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैली हैं। 

सेना के पास करीब 18 लाख एकड़ जमीन पर संपत्तियां हैं जबकि रेलवे की चल-अचल संपत्तियां करीब 12 लाख एकड़ में फैली हैं। साल 2009 में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां 4 लाख एकड़ जमीन पर फैली थी। मतलब साफ है कि बीते 13 वर्षों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। 

वक्फ बोर्ड देशभर में जहां भी कब्रिस्तान की घेरेबंदी करवाता है, उसके आसपास की जमीन को भी अपनी संपत्ति करार दे देता है। साल 1995 का वक्फ एक्ट कहता है कि अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की संपत्ति है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होती है कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। 

1995 का कानून यह जरूर कहता है कि किसी निजी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड अपना दावा नहीं कर सकता, लेकिन यह तय कैसे होगा कि संपत्ति निजी है? अगर वक्फ बोर्ड को सिर्फ लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो उसे कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं करना है, सारे कागज और सबूत उसे देने हैं जो अब तक दावेदार रहा है। कौन नहीं जानता है कि कई परिवारों के पास जमीन का पुख्ता कागज नहीं होता है। वक्फ बोर्ड इसी का फायदा उठाता है क्योंकि उसे कब्जा जमाने के लिए कोई कागज नहीं देना है। 

वर्ष 1995 में पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दीं। वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(आर) के मुताबिक, कोई संपत्ति किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक (पवित्र), मजहबी (धार्मिक) या (चेरिटेबल) परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा.दरअसल, वक्फ बोर्ड का एक सर्वेयर होता है। वहीं तय करता है कि कौन सी संपत्ति वक्फ की है, कौन सी नहीं।  

इस निर्धारण के तीन आधार होते हैं। अगर किसी ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी, अगर कोई मुसलमान या मुस्लिम संस्था जमीन की लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है या फिर सर्वे में जमीन का वक्फ की संपत्ति होना साबित हुआ। बड़ी बात है कि अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते। आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी। वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते। तब आप वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं। इस ट्राइब्यूनल में प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। 

वक्फ बोर्ड में एक वकील, एक विधायक, एक सांसद, एक टाउन प्लानर, एक आईएस ऑफिसर, एक स्कॉलर, एक मुतवल्ली होते हैं। वक्फ एक्ट कहता है कि ये सभी मुस्लिम होंगे. अश्वनी उपाध्याय ने कहा बोर्ड किसी भी जमीन पर कह दे कि यह जमीन वक्फ की है तो उसके नोटिस के खिलाफ कोर्ट नहीं, वक्फ ट्राइब्यूनल से गुहार लगानी होगी। यानि, जिस वक्फ बोर्ड ने गलत दावा किया, उसके खिलाफ शिकायत की सुनवाई भी उसी का एक्सटेंडेड इंस्टिट्यूशन करेगा।