सुगम और दुर्गम के बीच अधर में लटका छात्रों का भविष्य!




By 0 Posted on: 21/09/2022

उत्तराखंड: सुगम और दुर्गम के बीच अधर में लटका छात्रों का भविष्य!

उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग में अब अस्थायी व्यवस्था के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह नियम उन स्कूलों के लिए है जहां शिक्षक मेडिकल छुट्टी पर गए हैं या ढूंढें नहीं मिल रहे। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की सहमति के बाद सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या राज्य के बड़े विभागों में शुमार शिक्षा विभाग शिक्षकों का बंटवारा ठीक से नहीं कर पा रहा। सवाल ये भी है कि अगर ऐसी ही कामचलाऊ व्यवस्था रही तो छात्रों की पढ़ाई का क्या होगा। सुगम और दुर्गम की इस खाई के बीच लटकते छात्र शहरों का रुख करने को मजबूर हैं।  

आपको बता दें कि प्रदेश में प्राइमरी एजुकेशन में ही 30 हजार से ज्यादा स्कूल में दो हजार से ज्यादा पोस्ट पर शिक्षकों की कमी है। पिथौरागढ़ जैसे दुर्गम जिले में तो 364 शिक्षकों के पोस्ट खाली हैं। जबकि 400 से ज्यादा स्कूलों में एक ही शिक्षक है। वहीं राजधानी देहरादून में 800 से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं जहां संख्याबल के हिसाब से शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। जबकि 600 के करीब स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चे तो है लेकिन शिक्षकों की पोस्ट खाली है। ऐसे में शिक्षा विभाग अब अस्थायी व्यवस्था के तहत शिक्षकों का अप्वाइंटमेन्ट करने की तैयारी में है। जिसमें हर स्कूल में प्रिंसिपल को अधिकार होगा कि वो स्कूल में सब्जेक्ट टीचर्स के पैरामीटर को आंकते हुए अस्थायी तौर पर शिक्षक रख सकता है। इस काम के लिए बतौर फंड 50 हजार रूपए प्रिंसिपल को दिये जाएंगे। 

दरअसल शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी तौर पर नियुक्ति कोई सॉल्यूशन नही होता, न ही शिक्षा विभाग ऐसी व्यवस्था करने से चल सकता है। शिक्षा विभाग यदि शिक्षकों का बंटवारा ढंग से करे तो हर स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर किया जा सकता है। शिक्षक पहाड़ी इलाकों में जाने से बचते हैं. जिसकी वजह से शिक्षकों की कमी का मुद्दा बरकरार है। फिलहाल चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों के स्कूलों में अस्थायी नियुक्ति की बात कही जा रही है। लेकिन अब तक सरकार यह बताने में नितांत असमर्थ है कि आखिर ये तात्कालिक अस्थायी व्यवस्था उत्तराखंड के लिए कितनी कारगर साबित होगी।