उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली दौरे के बाद से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच इसको लेकर उत्सुकता चरम पर है।
जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। गढ़वाल और कुमाऊं के साथ तराई क्षेत्र से भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर जोर है। साथ ही संगठनात्मक समीकरण को साधते हुए उन विधायकों को मौका दिया जा सकता है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सूत्रों की मानें तो दिल्ली में हुई बैठकों में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन हुआ है और आलाकमान ने मुख्यमंत्री धामी को जल्द फैसला लेने के संकेत दिए हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार का बिगुल बज सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नए मंत्रियों की नियुक्ति आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति से भी जुड़ी होगी। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह संगठन के हर स्तर पर संतुलन और प्रतिनिधित्व के प्रति प्रतिबद्ध है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उत्तराखंड मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलती है और कौन बाहर होता है। यह फैसला न केवल राज्य की राजनीति बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों पर भी गहरा असर डालेगा।
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