उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) के तहत अहम बदलाव लागू कर दिए गए हैं, जिससे राज्य के नागरिकों को अधिक स्पष्ट, सख्त और व्यावहारिक कानूनी ढांचा प्राप्त हुआ है। इन बदलावों के अंतर्गत अब विवाह पंजीकरण की समय सीमा को 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दिया गया है, जिससे लोगों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में अधिक समय और सुविधा मिल सकेगी।
इसके साथ ही कानून में एक और कड़ा प्रावधान जोड़ा गया है—यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या बलपूर्वक सहवास करता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और आर्थिक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह कदम महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
नए संशोधन में रजिस्ट्रार जनरल को विवाह पंजीकरण रद्द करने और भू-राजस्व की वसूली करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है, जिससे कानून को लागू करने की प्रक्रिया अब ज्यादा असरदार और पारदर्शी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी या गलत जानकारी पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
इन बदलावों से उत्तराखंड का यह नया कानून न केवल राज्य में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। यह समान नागरिक संहिता को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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