Delhi

2050 तक वैश्विक धर्म परिवर्तन की तस्वीर: इस्लाम सबसे तेज़ी से बढ़ता धर्म, भारत में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी

नमस्कार, खास कार्यक्रम 'धर्म...अधर्म' में आपका स्वागत है और मैं हूं आपके साथ...। आज के खास कार्यक्रम में हम बात करेंगे उस वैश्विक परिवर्तन की, जो धर्म के मानचित्र को तेजी से नया आकार दे रहा है। प्यू रिसर्च सेंटर की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में धार्मिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और इसका मुख्य कारण प्रजनन दर, युवा आबादी का आकार और धर्म परिवर्तन की प्रवृत्ति है। प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले चार दशकों में ईसाई धर्म भले ही सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना रहेगा, लेकिन इस्लाम सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला धर्म होगा। यदि वर्तमान रुझान ऐसे ही जारी रहे, तो 2050 तक मुसलमानों की संख्या दुनिया भर में ईसाइयों के बराबर हो जाएगी। इसके विपरीत, नास्तिक, अज्ञेयवादी और अन्य गैर-धार्मिक लोग, जो अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में भले ही बढ़ रहे हों, विश्व जनसंख्या में उनका अनुपात घटता हुआ दिखाई देगा।

इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बौद्ध आबादी लगभग स्थिर बनी रहेगी, जबकि हिंदू और यहूदी आबादी में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यूरोप में मुसलमानों की संख्या में वृद्धि होगी और वे कुल जनसंख्या का लगभग 10% हिस्सा बन जाएंगे। भारत में हिंदू बहुलता बनी रहेगी, लेकिन इंडोनेशिया को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बन जाएगा। अमेरिका में भी धार्मिक संतुलन बदलेगा — जहां 2010 में ईसाई आबादी का तीन-चौथाई हिस्सा थे, वहीं 2050 तक यह आंकड़ा दो-तिहाई तक गिर जाएगा। साथ ही यहूदी धर्म अब अमेरिका का सबसे बड़ा गैर-ईसाई धर्म नहीं रहेगा, क्योंकि मुसलमानों की संख्या उसे पार कर जाएगी।

प्यू रिसर्च के इन अनुमानित आंकड़ों में धर्मों की वर्तमान स्थिति, उनकी भौगोलिक स्थिति, जनसांख्यिकीय कारक जैसे आयु, जन्म व मृत्यु दर, अंतरराष्ट्रीय प्रवास और धर्मांतरण की प्रवृत्तियों को ध्यान में रखा गया है। उप-सहारा अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में ईसाई धर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जहां भविष्य में हर 10 में से 4 ईसाई पाए जाएंगे। यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर धार्मिक शक्ति संतुलन में संभावित बदलावों की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है, जो न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।

0 - Comments

Leave a comment