600 वर्षों की नींद के बाद जागा रूस का क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी, जिसने अब अपनी पूरी ताकत के साथ धरती को हिला दिया है। रूस के पूर्वी हिस्से में स्थित यह प्राचीन ज्वालामुखी अचानक सक्रिय हो गया, और इसके विस्फोट से 6 किलोमीटर ऊंचाई तक राख और धुएं का गुबार आसमान में छा गया।
यह ज्वालामुखी रूस के कामचटका प्रायद्वीप में स्थित है, जो पहले से ही एक सक्रिय ज्वालामुखीय क्षेत्र माना जाता है। लेकिन क्रशेनिनिकोव को आखिरी बार 15वीं शताब्दी के आसपास सक्रिय होते देखा गया था, यानी यह लगभग 600 साल से निष्क्रिय था। वैज्ञानिकों और भू-वैज्ञानिकों के लिए यह घटना हैरान करने वाली और ऐतिहासिक मानी जा रही है।
रूसी आपातकालीन सेवा के अनुसार, फिलहाल आसपास के इलाकों में लाल चेतावनी (Red Alert) जारी कर दी गई है। राख के कारण हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है, और विमान सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने, मास्क पहनने और गैर-ज़रूरी यात्रा से बचने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज्वालामुखी अभी और भी विस्फोट कर सकता है, जिससे क्षेत्र में भूस्खलन, लावा प्रवाह, और वायुमंडलीय अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आसपास के गांवों और कस्बों में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है, और निगरानी ड्रोन से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
इस विस्फोट ने न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया के ज्वालामुखी वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है, क्योंकि यह एक दुर्लभ भूगर्भीय घटना है। आने वाले दिनों में इसकी जमीनी और वैश्विक जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर अध्ययन शुरू हो चुका है।
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