बारिश का मौसम आमतौर पर राहत और ठंडक लेकर आता है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक बारिश सिर्फ मौसम नहीं, मुसीबत बनकर आई है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, अयोध्या, मुरादाबाद, कानपुर और हापुड़ जैसे शहरों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि सड़कों का नज़ारा किसी जल-जंगल जैसा लगने लगा है।
सड़कों पर घुटनों तक पानी, जाम में फंसी गाड़ियां, जगह-जगह गड्ढे, और बिजली-पानी की समस्या—यह सब आम लोगों के लिए दैनिक संघर्ष बन गया है। ऑफिस जाने वाले हों या स्कूल के बच्चे, हर कोई बारिश की वजह से बेहाल है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन बारिश की चेतावनी से पहले सोया हुआ था? क्या हर साल होने वाली इस समस्या के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं की गई थी? नगर निगमों की ओर से नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे तो बहुत होते हैं, लेकिन हकीकत हर बारिश में उजागर हो जाती है।
दिल्ली और नोएडा जैसे विकसित शहरों में भी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की ये हालत देखकर लोग हैरान हैं। टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच जब हर साल बारिश में शहर थम जाते हैं, तो यह साफ होता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं।
लोगों का गुस्सा अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है—वीडियो, तस्वीरें और शिकायतों की बाढ़ आ गई है। लेकिन सवाल अब भी वही है:
क्या अगली बारिश तक हालात सुधरेंगे या फिर जनता को हर साल यही मुसीबत झेलनी पड़ेगी?
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