Delhi

भारत में आपातकाल की 50वीं बरसी: लोकतंत्र की चेतावनी

भारत में 25 जून, 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं बरसी पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा मोड़ था, जब संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया, प्रेस पर अंकुश लगाया गया, राजनीतिक विरोध को दबाया गया और हजारों लोगों को जेलों में बंद किया गया।

आज, जब आपातकाल की आधी सदी पूरी हो चुकी है, यह दिन केवल इतिहास की एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परीक्षा, संविधान की मजबूती, और नागरिक चेतना के जागरण का प्रतीक बन चुका है। विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों और युवाओं द्वारा देशभर में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में इस कालखंड के सबक और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण की बात हो रही है।

यह बरसी हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादा का नाम है। भारत ने आपातकाल के बाद जिस संकल्प और जनबल से लोकतंत्र को पुनः स्थापित किया, वह विश्व में मिसाल है।

For more information, visit: https://youtu.be/jZwHTv49ywM

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