Delhi

China Population Crisis: गिरती जनसंख्या से अर्थव्यवस्था संकट में

चीन, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या के कारण विश्व मंच पर आर्थिक और रणनीतिक महाशक्ति बनकर उभरा था, अब एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है। हाल के वर्षों में देश की जन्मदर में इतनी तेज़ गिरावट आई है कि सरकार को अब सीधे तौर पर नागरिकों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहन देना पड़ रहा है। इसके तहत हर बच्चे पर सालाना सब्सिडी की योजना चलाई जा रही है।

साल 2024 में चीन की जन्मदर ऐतिहासिक रूप से सबसे कम स्तर पर पहुंच गई है। इस गिरती जनसंख्या का असर केवल सामाजिक ढांचे पर ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है। युवा आबादी की कमी के कारण श्रम बल सिकुड़ रहा है और वृद्धजन की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर भारी दबाव बनता जा रहा है।

चीन की सरकार ने दो से तीन बच्चों की नीति को अपनाने के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी देने की घोषणा की है। कई प्रांतों में परिवारों को बच्चे के जन्म पर नकद राशि, कर में छूट, मुफ्त शिक्षा, और यहां तक कि किराए में रियायतें दी जा रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को लंबे मातृत्व अवकाश और पुरुषों को पितृत्व अवकाश देने की भी योजनाएं बनाई जा रही हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ आर्थिक मदद से समस्या का समाधान नहीं होगा। युवाओं में नौकरी की असुरक्षा, बढ़ती महंगाई, बच्चों की परवरिश की लागत, और शहरी जीवन की तेज़ रफ्तार जैसे कई कारक हैं जो लोगों को शादी और बच्चे पैदा करने से रोक रहे हैं। समाज में बढ़ती एकाकी जीवनशैली और करियर को प्राथमिकता देने की सोच भी इस संकट को और गहरा कर रही है।

इस जनसंख्या संकट का सीधा असर चीन की दीर्घकालिक आर्थिक योजनाओं पर पड़ सकता है। उपभोक्ताओं की संख्या कम होने से आंतरिक बाजार सिकुड़ सकता है, जिससे उत्पादन और निर्यात पर भी असर पड़ेगा। साथ ही, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की कमी देश की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी कमजोर कर सकती है।

कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले दशकों में चीन न केवल आर्थिक रूप से धीमा हो सकता है, बल्कि उसकी वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षाओं को भी झटका लग सकता है। यह स्थिति जापान जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समान होती जा रही है, जहां दशकों से जनसंख्या घटती रही है और उसका सीधा असर आर्थिक विकास पर पड़ा है।

इस बीच, चीन सरकार द्वारा शुरू की गई सब्सिडी योजना और नई पारिवारिक नीतियों की सफलता अभी अनिश्चित है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ पैसों से लोगों को माता-पिता बनने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, या इसके लिए सामाजिक और मानसिक दृष्टिकोण में भी बदलाव लाना जरूरी होगा।

For more information, visit: https://youtu.be/0gA8pQD3uk0

0 - Comments

Leave a comment