दिल्ली में यमुना नदी एक बार फिर खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण नदी का जलस्तर लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे राजधानी के निचले इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
बुराड़ी, जगतपुर, संतनगर और वजीराबाद जैसे क्षेत्रों में पानी लोगों के घरों तक पहुंच चुका है। नालों के ओवरफ्लो होने और नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं। लोगों को घरों से बाहर निकलने में दिक्कत हो रही है, और कुछ जगहों पर प्रशासन ने राहत शिविर भी बनाए हैं।
इस जलभराव का सबसे ज्यादा प्रभाव किसानों पर पड़ा है। निचले क्षेत्रों में स्थित खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। चारा, सब्ज़ी, धान और अन्य फसलों का उत्पादन पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
प्रशासन ने जल स्तर की निगरानी के लिए अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे वाले इलाकों में जाने से बचें। राहत और बचाव दल सतर्क हैं, और एनडीआरएफ को तैनात किया गया है।
यमुना का जलस्तर बढ़ना हर साल दिल्ली के लिए एक बड़ा संकट बनता जा रहा है। जल प्रबंधन और नदी किनारे अवैध निर्माण जैसे मुद्दों को लेकर भी अब चर्चा तेज़ हो गई है। यदि बारिश और पानी छोड़े जाने का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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