प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भारत का पक्ष मजबूती और स्पष्टता के साथ रखा। यह सम्मेलन विश्व के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां वैश्विक चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा होती है। पीएम मोदी के भाषण ने न केवल भारत की भूमिका को वैश्विक मंच पर और अधिक सशक्त किया, बल्कि मानवता के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक – आतंकवाद – के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की ज़रूरत को भी उजागर किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया और कहा कि यह न केवल निर्दोष लोगों की जान लेता है, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को गहरे ज़ख्म देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बिना किसी भेदभाव के इसके खिलाफ सख्त और सामूहिक कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक शांति, स्थिरता और समावेशी विकास का पक्षधर रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आपूर्ति शृंखला, डिजिटल समावेशन, और विकासशील देशों की आवाज़ को प्रमुखता देने जैसे विषयों पर भी भारत के दृष्टिकोण को साझा किया।
G7 आउटरीच सत्र में पीएम मोदी की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक मजबूत और जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। उनके विचारों को न केवल G7 सदस्य देशों ने सराहा, बल्कि अन्य अतिथि राष्ट्रों ने भी भारत के संतुलित दृष्टिकोण और सकारात्मक नेतृत्व की प्रशंसा की।
इस संबोधन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि नीति और क्रियान्वयन के स्तर पर भी गंभीर है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक चेतावनी और आह्वान दोनों है — कि अगर आतंकवाद को जड़ से समाप्त करना है, तो हमें एकजुट होना ही होगा।
देखिए G7 सम्मेलन से पीएम नरेंद्र मोदी का पूरा संबोधन, जिसमें उन्होंने न केवल भारत का दृष्टिकोण रखा, बल्कि दुनिया को साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक नई दिशा भी दी।
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