प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने संबोधन के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भारतीय सेना एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मिशन पर तैनात थी, तब विपक्ष ने देश के भीतर भ्रम और अफवाहें फैलाकर जवानों का मनोबल गिराने की कोशिश की। पीएम मोदी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय को भी राजनीति का हथियार बना लिया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब हमारे सैनिक सीमाओं पर जान की बाजी लगाकर 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दे रहे थे, उस समय कुछ नेता सबूत मांगने की राजनीति कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह रवैया सिर्फ सेना के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के खिलाफ भी है। ऐसे वक्त में जब राष्ट्र को एकजुटता की जरूरत थी, तब विपक्ष ने केवल सवाल उठाकर सेना की कार्यप्रणाली और सरकार की नीयत पर संदेह प्रकट किया।
'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना द्वारा हाल ही में चलाया गया एक गोपनीय और रणनीतिक सैन्य अभियान था, जिसे सीमावर्ती इलाकों में आतंकी गतिविधियों को खत्म करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया। इस अभियान की सफलता को लेकर जहां जनता में गर्व और संतोष की भावना थी, वहीं कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए और सबूत की मांग की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ नेता बार-बार सेना के शौर्य पर संदेह करते हैं, जिससे दुनिया में गलत संदेश जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति को वोट बैंक से ऊपर उठकर देशहित में करना चाहिए, खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद संसद में माहौल गरमा गया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि सवाल पूछना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे राष्ट्रविरोधी करार देना गलत है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार हर मुद्दे पर सवाल उठाने वालों को देशद्रोही साबित करने की कोशिश करती है।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के इस तेवर के बाद भाजपा सांसदों ने जोरदार समर्थन किया और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। यह स्पष्ट हो गया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अब सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक राजनीतिक बहस का केंद्र बिंदु बन चुका है। जनता के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश की सुरक्षा जैसे मुद्दों को राजनीतिक रंग देना उचित है।
सियासी गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विपक्ष की भूमिका सिर्फ सवाल उठाने तक सीमित रहनी चाहिए या फिर उसे भी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने एक बार फिर से ‘राष्ट्रवाद बनाम राजनीति’ की बहस को हवा दे दी है।
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