पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी आदतों पर लौट आया है—अनर्गल बयानबाज़ी, झूठे आरोप और भारत के खिलाफ गीदड़भभकियां। इस बार पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपने ताज़ा बयानों से न केवल भारत को चुनौती देने की कोशिश की है, बल्कि क्षेत्रीय शांति को भी गहरे संकट में डाल दिया है। एक तरफ वह भारत पर बिना किसी आधार के युद्ध की धमकियां दे रहे हैं, तो दूसरी ओर सिंधु जल समझौते जैसे द्विपक्षीय मुद्दों को हथियार बनाकर सियासी खेल खेलने का प्रयास कर रहे हैं।
जनरल मुनीर ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भारत को परमाणु हमले की अप्रत्यक्ष चेतावनी दी और कहा कि पाकिस्तान "अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।" यह बयान न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि यह उस निराशा और अस्थिरता का परिचायक भी है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और अर्थव्यवस्था इस समय जूझ रही है। जब कोई देश अंदर से कमजोर होता है, तब वह अक्सर बाहर के दुश्मन बनाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है — और पाकिस्तान की सेना लंबे समय से यही करती आई है।
इसके अलावा मुनीर का अमेरिका दौरा और डोनाल्ड ट्रंप को ‘सीजफायर में भूमिका निभाने’ के लिए दिया गया धन्यवाद कई सवाल खड़े करता है। क्या पाकिस्तान को किसी वैश्विक शक्ति से परोक्ष समर्थन मिल रहा है? क्या यह क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने की किसी बड़ी कूटनीतिक योजना का हिस्सा है? अमेरिका जैसे देशों की चुप्पी भी इस पूरे घटनाक्रम में संदेह पैदा करती है।
भारत, जिसने हमेशा संयम और शांति की नीति को प्राथमिकता दी है, अब भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लेकिन यह भी सच है कि पाकिस्तान को अतीत में कई बार करारा जवाब मिल चुका है —चाहे वह सर्जिकल स्ट्राइक हो या बालाकोट एयर स्ट्राइक। भारतीय सेना और कूटनीति दोनों स्तरों पर पाकिस्तान को साफ संकेत मिल चुके हैं कि भारत उकसावे की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करता।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान की छवि लगातार बिगड़ती जा रही है। FATF की निगरानी सूची से मुश्किल से बाहर निकलने के बाद, पाकिस्तान फिर से उन्हीं गलतियों को दोहराता नजर आ रहा है। उसके नेताओं की भाषा, बयान और नीतियाँ न सिर्फ बचकानी हैं, बल्कि खतरनाक भी हैं।
अब यह देखना बाकी है कि पाकिस्तान कब तक इस खतरनाक बयानबाज़ी का सहारा लेकर अपनी नाकामियों को ढकने की कोशिश करता रहेगा। पर एक बात तो तय है—भारत न तो डरने वाला है, न ही झुकने वाला। विश्व समुदाय को भी चाहिए कि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों की निंदा करे और दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए।
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