देश की राजनीति एक बार फिर संविधान को लेकर गरमा गई है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय होसबाले द्वारा दिए गए हालिया बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। होसबाले के बयान को लेकर विपक्ष ने खासा नाराजगी जताई है और इसे संविधान की आत्मा पर हमला करार दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "आरएसएस की असली मंशा एक बार फिर सामने आ गई है। ये लोग संविधान को कमज़ोर करना चाहते हैं ताकि देश की लोकतांत्रिक नींव हिला सकें।" राहुल गांधी ने इसे एक विचारधारा से जुड़ा षड्यंत्र बताया, जो देश को पीछे ले जाना चाहती है।
इस विवाद पर अन्य विपक्षी दलों जैसे TMC, सपा, और आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार और आरएसएस को घेरा है। विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक बड़े एजेंडे की झलक है — जहां संविधान की मूल भावना, यानी न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को चुनौती दी जा रही है।
वहीं, आरएसएस और भाजपा की ओर से सफाई दी गई है कि होसबाले का बयान तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और संगठन का संविधान में पूरा विश्वास है। हालांकि, इस सफाई से विवाद थमता नजर नहीं आ रहा।
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