रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। यह संघर्ष केवल इन दो देशों के बीच की लड़ाई नहीं रह गया, बल्कि यह अब वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा, और रणनीतिक संतुलन का केंद्र बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में एक ऐसा देश है जो न तो सीधे युद्ध का पक्षधर है, न ही पूरी तरह तटस्थ—वह है भारत। नई दिल्ली से यूक्रेन की दूरी लगभग 5000 किलोमीटर है, लेकिन भारत की भूमिका इस युद्ध में कहीं अधिक समीप और प्रभावशाली हो चुकी है।
भारत ने अपनी कूटनीतिक सूझबूझ के साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष में वह संतुलन बनाया है जो कई पश्चिमी राष्ट्र भी नहीं साध पाए। भारत ने न तो रूस की पूरी तरह से आलोचना की और न ही यूक्रेन के प्रति उदासीनता दिखाई। इस संतुलित रुख ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित किया जो विवेकपूर्ण, स्वतंत्र और रणनीतिक रूप से सोचने वाला है।
रूस से सस्ते दर पर कच्चा तेल खरीदकर भारत ने अपनी आर्थिक ज़रूरतों को पूरा किया और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की। यही नहीं, भारत ने इस व्यापार को केवल आर्थिक अवसर नहीं बल्कि रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। इससे एक तरफ रूस के साथ उसके रिश्ते मजबूत बने, वहीं दूसरी ओर वह पश्चिमी देशों की आलोचना से भी काफी हद तक बचा रहा।
भारत की इस भूमिका को 'अदृश्य लेकिन प्रभावशाली साझेदार' के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने कई बार शांति की वकालत की, युद्धविराम का समर्थन किया और वैश्विक मंचों पर युद्ध के मानवतावादी प्रभावों की चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र, G20 और अन्य मंचों पर भारत ने न केवल संवाद को बढ़ावा दिया, बल्कि खुद को एक "विकासशील विश्व की आवाज़" के रूप में भी प्रस्तुत किया।
भारत की इस संतुलनकारी रणनीति को दुनिया भर में सराहा जा रहा है। पश्चिम हो या पूर्व, सभी भारत के इस रुख को समझने और उसके साथ सहयोग करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इससे भारत की वैश्विक राजनीति में स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता में इजाफा हुआ है।
अब सवाल यह नहीं रह गया कि भारत किसके पक्ष में है, बल्कि यह कि भारत का यह संतुलन भविष्य की वैश्विक कूटनीति को कैसे दिशा देगा। क्या भारत आने वाले समय में रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों में शांतिदूत की भूमिका निभा सकता है? क्या भारत का यह रुख उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसी संस्थाओं में स्थायी सदस्यता दिला सकता है? इन सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करती है हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
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