अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक आर्थिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि उनके कार्यकाल में चीन पर लगाए गए टैरिफ से अमेरिका को अब तक ट्रिलियन डॉलर के आसपास की कमाई हो चुकी है। ट्रंप के इस दावे ने न केवल आर्थिक जगत में चर्चा को जन्म दिया है, बल्कि इसे आगामी अमेरिकी चुनावों के मद्देनज़र भी अहम माना जा रहा है। उनका कहना है कि इन टैरिफ का अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है और इसके चलते महंगाई में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि टैरिफ किसी दंडात्मक नीति के तहत नहीं, बल्कि अमेरिका के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए लगाए गए थे। उनका तर्क है कि चीन से आयात होने वाले उत्पादों पर शुल्क लगाने से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिला है और इससे अमेरिकी कंपनियों को लाभ हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि इन टैरिफ्स के कारण अमेरिका में नौकरियों के अवसर भी बढ़े हैं और टैक्स के माध्यम से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त हुआ है।
हालांकि ट्रंप के इस बयान पर आर्थिक विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि टैरिफ्स से वास्तव में अमेरिका को अल्पकालिक लाभ मिला, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभाव जटिल हो सकते हैं, खासकर उपभोक्ताओं पर महंगे सामान का बोझ बढ़ने की आशंका के चलते। लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महंगाई दर में कोई असामान्य उछाल नहीं देखा गया और अमेरिका की आम जनता पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक खींचतान फिर तेज़ हो रही है। वहीं, वैश्विक मंचों पर टैरिफ और व्यापार युद्ध के मुद्दे लगातार उठते रहे हैं। ट्रंप का यह रुख संकेत देता है कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं, तो ट्रेड पॉलिसी में सख्त रवैया जारी रहेगा।
ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत दोनों में हलचल पैदा कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर बाइडेन प्रशासन या चीन की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
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