मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्माने वाली है, क्योंकि 28 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस ने कमर कस ली है। हाल ही में किए गए "न्याय सत्याग्रह" आंदोलन से पार्टी को नई ऊर्जा और राजनीतिक धार मिली है, जिसे अब सदन में सरकार के खिलाफ हमले के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
कांग्रेस की रणनीति साफ है – इस बार किसी भी मुद्दे पर चुप्पी नहीं साधी जाएगी। पार्टी कानून-व्यवस्था की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में घोटाले और किसानों के लंबित मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि वे तथ्यों और दस्तावेजों के साथ हर मामले में सरकार से जवाब मांगेंगे और किसी भी तरह की लीपापोती नहीं चलने देंगे।
कांग्रेस का कहना है कि आम जनता की आवाज को सदन में उठाना अब और ज़रूरी हो गया है क्योंकि सरकार ने कई अहम मामलों पर चुप्पी साध रखी है। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष सड़क से सदन तक का संघर्ष करेगा।
वहीं, भाजपा सरकार के लिए यह सत्र चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि विपक्ष पूरी तैयारी के साथ उतर रहा है और जनता की नाराजगी को मुद्दा बनाकर उसे सदन में दिखाने की योजना पर काम कर रहा है।
इस रिपोर्ट में देखिए – कांग्रेस की रणनीति, मुख्य मुद्दे जिन पर सत्र के दौरान बहस होगी, और कैसे यह मानसून सत्र राज्य की राजनीति के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।
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