उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मंडल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हाई-लेवल समीक्षा बैठक आज पूरे दिन सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी रही। यह बैठक महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि स्पष्ट संदेश देने वाला सख्त प्रशासनिक कार्यक्रम साबित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं की प्रगति और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर समीक्षा की।
बैठक में अलीगढ़, एटा, हाथरस और कासगंज जिलों के मंत्रीगण, सांसद, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट की परत-दर-परत जांच की और हर ज़िले के अफसरों से सीधे सवाल किए।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल फाइलों पर योजनाएं नहीं चलेंगी, बल्कि ज़मीन पर काम होता दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “धीमी रफ्तार और लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए परिणाम देने वाला प्रशासन ज़रूरी है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए कि अपराध और अराजकता को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। हर ज़िले के पुलिस और प्रशासनिक प्रमुखों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित फील्ड विज़िट करें, जनसुनवाई को प्राथमिकता दें और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सीएम योगी का यह दौरा साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश की सरकार अब "परफॉर्म या बाहर" की नीति पर काम कर रही है। आने वाले महीनों में यदि अधिकारियों के प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
इस समीक्षा बैठक ने अलीगढ़ मंडल के प्रशासन को एक नई दिशा और स्पष्ट लक्ष्य दिया है—जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला, तेज़ रफ्तार और जवाबदेह शासन।
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