बुलंदशहर की सड़कों पर एक बार फिर दर्दनाक हादसा देखने को मिला, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब तेज रफ्तार वाहन ने सामने से आ रही बस को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही कई लोगों ने दम तोड़ दिया और दर्जनों घायल हो गए। घायलों को तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलंदशहर की सड़कें आए दिन ऐसे हादसों की गवाह बनती हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही लगातार बनी हुई है। यातायात नियमों का पालन न करने, स्पीड चेकिंग की कमी और अवैध रूप से दौड़ते वाहनों की वजह से सड़कें मौत का अखाड़ा बन चुकी हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ हादसों के बाद औपचारिक कार्रवाई कर चुप बैठ जाता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
इस हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है। गांव और कस्बों में मातम पसरा हुआ है। घायलों के परिवारजन अस्पतालों में रोते-बिलखते देखे गए। हालांकि जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवज़े का आश्वासन दिया है, लेकिन स्थानीय लोग इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुलंदशहर जैसे क्षेत्रों में सड़क पर पर्याप्त लाइटिंग, साइन बोर्ड और स्पीड चेकिंग सिस्टम की तत्काल ज़रूरत है। साथ ही, ट्रैफिक पुलिस की गश्त और निगरानी बढ़ाए जाने की मांग भी ज़ोर पकड़ रही है। यह हादसा न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि कब तक लोग जान गंवाते रहेंगे और कब तक सड़कें मौत का जाल बनी रहेंगी।
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