गौतमबुद्धनगर कमिश्नरी में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें कानून का कोई भय नहीं रह गया है। पुलिस द्वारा किए जा रहे लगातार एनकाउंटर और सख्त कार्रवाइयों के बावजूद दबंगों का दुस्साहस रुकने का नाम नहीं ले रहा। हालिया घटना दादरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भोगपुर गांव से सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहला कर रख दिया है।
बताया जा रहा है कि भोगपुर गांव में तीन दोस्त आपस में किसी बात को लेकर विवाद में उलझ गए। विवाद इतना बढ़ा कि दो दबंग दोस्तों ने अपने ही तीसरे दोस्त पर गोली चला दी। गोली सीने में जा लगी और युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गांव की गलियों में गोलियों की आवाज़ गूंजी और फिर मातम की चीखें हर ओर फैल गईं। जिस गांव में कभी मेल-जोल और भाईचारे की पहचान हुआ करती थी, अब वहां डर और खामोशी ने जगह ले ली है।
मृत युवक के घर में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों की चीखें पूरे गांव को झकझोर रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मृतक और आरोपी आपस में पुराने मित्र थे, लेकिन हाल ही में उनके बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव चल रहा था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मतभेद इतना भयानक मोड़ लेगा कि एक दोस्त, दूसरे की जान ले लेगा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हालांकि अभी तक आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में देरी और दबंगों को मिल रहा ‘अघोषित संरक्षण’ ही इस तरह की घटनाओं को जन्म दे रहा है।
यह घटना न केवल अपराध की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। क्या गौतमबुद्धनगर जैसे शहरी और संवेदनशील क्षेत्र में भी अब लोग सुरक्षित नहीं हैं? क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
भोगपुर गांव अब सिर्फ एक हत्या की जगह नहीं है, बल्कि वह गांव बन चुका है जहां मातम, चीखें और भय ने स्थायी रूप ले लिया है। जिस युवक की हत्या हुई, उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह घटना एक बार फिर प्रशासन को चेतावनी देती है कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करना अब टालने का विषय नहीं रहा, बल्कि तत्काल आवश्यकता बन चुकी है।
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