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कानपुर में गंगा का कहर: बाढ़ से तबाही, प्रशासन बेखबर

उत्तर प्रदेश के कानपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में इस समय हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है। मोहल्ले-मोहल्ले जलमग्न हो चुके हैं, और लोग अपना घर छोड़कर राहत शिविरों की ओर जाने को मजबूर हैं।

गंगा का यह बढ़ता हुआ रौद्र रूप न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही और सुस्त तैयारियों ने आम नागरिकों की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं।

जहां एक तरफ बुज़ुर्ग, महिलाएं और बच्चे सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की तरफ से मौके पर न तो पर्याप्त नावें हैं, न राहत सामग्री, और न ही चिकित्सा सुविधाएं। जिन इलाकों में पहले से जलभराव था, वहां अब हालात और भी खराब हो चुके हैं।

स्थानीय लोगों की मानें तो कई बार शिकायत के बावजूद न तो निकासी की कोई व्यवस्था की गई और न ही चेतावनी समय पर जारी हुई। स्कूल बंद हैं, छोटे व्यापारी और दुकानदार अपने रोजगार को लेकर चिंतित हैं, और किसानों की फसलें डूब चुकी हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संकट केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम है। हर साल आने वाली बाढ़ के बावजूद आज भी बुनियादी इंतज़ाम अधूरे हैं।

लोगों का सवाल है – जब हर साल यही होता है, तो क्या अब भी सरकार और प्रशासन इससे कुछ सीखेगा? या फिर बाढ़ के बाद सबकुछ भुला दिया जाएगा?

इस रिपोर्ट में हम आपको दिखाएंगे –

कहाँ-कहाँ हालात सबसे ज़्यादा गंभीर हैं,

क्या कदम उठाए गए हैं (या नहीं उठाए गए),

और किस तरह लोग खुद अपने प्रयासों से ज़िंदगी बचाने में लगे हैं।

देखिए ग्राउंड से हमारी विशेष रिपोर्ट – गंगा का बढ़ता जलस्तर और बेहाल लोग।

For more information, visit: https://youtu.be/v_nk9o6TWcM

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