UttarPradesh

मेरठ में घेवर बना ज़हर: 50 लोग बीमार, सिंथेटिक मावे से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से आई एक चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। सावन और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के बीच जब बाजार में घेवर और मिठाइयों की भारी मांग होती है, तब मेरठ में बिक रहा एक विशेष घेवर लोगों के लिए मिठास नहीं, बल्कि ज़हर साबित हो गया। इस घेवर को खाने के बाद करीब 50 से अधिक लोग अचानक बीमार पड़ गए, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।

घटना तब सामने आई जब शहर के विभिन्न मोहल्लों से लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बेहोशी की हालत में स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने इसे फूड पॉइजनिंग का गंभीर मामला बताया और प्रशासन को तुरंत सूचित किया गया। जैसे ही स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की पड़ताल शुरू की, तब इस पूरी घटना की भयावह सच्चाई सामने आई।

जांच में पता चला कि जिस घेवर को खाने के बाद लोग बीमार हुए, उसमें सिंथेटिक यानी नकली मावा इस्तेमाल किया गया था। यह मावा खाने योग्य नहीं था, बल्कि इसमें मिलाए गए रसायन और घटिया गुणवत्ता वाले दूध उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हुए। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके पर कई मिठाई दुकानों और भट्ठियों पर छापेमारी की, जिसमें बड़े स्तर पर नकली मावे और खराब तेल के नमूने जब्त किए गए।

मेरठ प्रशासन और नगर निगम ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया है। जिन दुकानों से संदिग्ध घेवर बेचे गए थे, उन्हें तुरंत सील कर दिया गया है और उन दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात या सस्ते दाम पर मिलने वाली मिठाई को खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्रोत की पुष्टि अवश्य कर लें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले के आला अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यह अपराध अब केवल उपभोक्ता अधिकार का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जन स्वास्थ्य और जान से खेलने जैसा अपराध माना जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर देश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। त्योहारों में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर हर साल अपनी जेबें भरते हैं और आम जनता की ज़िंदगी दांव पर लग जाती है। अब यह ज़रूरी हो गया है कि उपभोक्ता भी सतर्क रहें और प्रशासन ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई करे।

मेरठ में हुई यह घटना एक चेतावनी है—मिठाई की दुकानें चाहे कितनी भी चमकदार क्यों न हों, असली सवाल है कि उनके भीतर छुपी सामग्री कितनी सुरक्षित है?

For more information, visit: https://youtu.be/Bc0XjkBCQZU

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