अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2024 पर बरेली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उस समय नया विवाद खड़ा हो गया, जब ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मंच से सूर्य नमस्कार को "इस्लाम में हराम" बताया। मौलाना ने कहा कि भले ही वह योग का समर्थन करते हैं, लेकिन सूर्य की ओर झुककर नमस्कार करना इस्लामिक मान्यताओं के विरुद्ध है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धर्म और योग को लेकर टकराव की स्थिति बन गई। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जेपीएस राठौर ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सूर्य नमस्कार कोई धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने इस बयान को "छोटी सोच" बताया और कहा कि योग और सूर्य नमस्कार को धर्म के चश्मे से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
जेपीएस राठौर ने कहा कि योग न केवल भारत की देन है, बल्कि अब यह पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और मानसिक शांति का प्रतीक बन चुका है। ऐसे में किसी भी धार्मिक समुदाय को इससे डरने या विरोध करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सूर्य नमस्कार के पीछे कोई पूजा-पद्धति नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन को ऊर्जावान बनाने की एक क्रिया है।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग मौलाना के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक कट्टरता बता रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग योग और सूर्य नमस्कार को भारतीय गौरव का प्रतीक मानते हुए इसकी सार्वभौमिकता की बात कर रहे हैं।
यह विवाद अब योग बनाम आस्था, या कहें कि भारतीय परंपरा बनाम धार्मिक कट्टरता का मुद्दा बनता जा रहा है, जिसने देशभर में बहस को जन्म दे दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य धार्मिक और राजनीतिक संगठन क्या रुख अपनाते हैं।
इस वीडियो में जानिए:
क्या कहा मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने
कैसे दिया मंत्री जेपीएस राठौर ने जवाब
सूर्य नमस्कार को लेकर धार्मिक मतभेद
योग दिवस पर राजनीति का रंग
और जनता की इस पर क्या राय है?
For more information, visit: https://youtu.be/mNPajpbxzwM

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