उत्तर प्रदेश में मानसून ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। खासकर तराई और पूर्वांचल के इलाकों में लगातार हो रही घनघोर बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के 44 जिलों में आज फिर से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिससे कई स्थानों पर जलभराव, सड़कें डूबने और बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे हैं।
रायबरेली में सोमवार को रिकॉर्ड 202 मिमी बारिश, बदायूं में 190 मिमी, जबकि अयोध्या में 151 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि मानसून इस बार कितनी ताकत के साथ आया है।
राज्य सरकार और मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 25 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि आने वाले घंटों में भारी बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।
खासकर ग्रामीण और निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। स्कूलों को बंद करने, बिजली काटने और प्रशासनिक अलर्ट जैसी कई आपात तैयारियाँ पहले ही की जा चुकी हैं।
आपदा प्रबंधन टीमें, NDRF और SDRF की यूनिट्स अलर्ट पर हैं और प्रभावित इलाकों में गश्त कर रही हैं। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे बिना ज़रूरत घर से बाहर न निकलें, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूरी बनाए रखें, और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।
इस बार का मानसून न सिर्फ खेती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है, बल्कि उसकी तीव्रता ने सरकार और नागरिकों — दोनों के लिए सतर्कता और सजगता की कसौटी भी खड़ी कर दी है।
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