उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा इन दिनों पूरे जोरों पर है, हर साल की तरह लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ की भक्ति में लीन होकर लंबी यात्रा पर निकलते हैं। लेकिन इस बार ज़मीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं। श्रद्धालु बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं — न पीने का साफ पानी मिल रहा है, न शौचालयों की व्यवस्था है, और न ही विश्राम के लिए किसी प्रकार की ठोस सुविधा उपलब्ध है।
जहां सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े मंचों से यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर दावे कर रहे हैं, वहीं सच्चाई यह है कि श्रद्धालु कड़कड़ाती धूप में नंगे पांव चलने के साथ-साथ पीने के पानी और साफ-सफाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाओं का भी अभाव है, जिससे थके हुए कांवड़ियों की परेशानी और बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए कैंप भी पर्याप्त नहीं हैं। कई कांवड़ियों ने कैमरे पर बताया कि उन्हें रात भर सड़क किनारे सोना पड़ा, कई बार तो खाना भी उपलब्ध नहीं हो पाया। इन हालातों में भी भक्त अपनी आस्था में अडिग हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या ये श्रद्धालु बेहतर सुविधाओं के हकदार नहीं हैं?
इस रिपोर्ट में देखिए ज़मीनी हकीकत — किस तरह एक आस्था की यात्रा अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही है। साथ ही सुनिए श्रद्धालुओं की जुबानी, कि उन्हें किन-किन परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। सरकार की तैयारी कितनी दिखावटी है और क्या बदलाव ज़रूरी हैं — जानिए इस विस्तृत कवरेज में।
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