Uttarakhand

धराली आपदा के 9 दिन बाद भी राहत कार्य जारी, 66 लोग अब भी लापता

उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा को नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन वहां राहत और बचाव कार्य आज भी पूरी ताकत से जारी है। इस त्रासदी ने न केवल स्थानीय लोगों की ज़िंदगी को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रशासन और राहत एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब तक 1308 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है, जिनमें कई बुज़ुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। लेकिन चिंता का विषय यह है कि 66 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 24 नेपाली नागरिक भी शामिल हैं। यह आंकड़ा हर बीतते दिन के साथ और पीड़ा लेकर आ रहा है।

धराली क्षेत्र में खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक फिर से बढ़ने लगा है, जिससे स्थिति और भयावह हो गई है। हाल ही में बने कुछ अस्थायी पुल तेज़ बहाव में बह गए हैं, जिससे बचाव दलों की आवाजाही और भी कठिन हो गई है। ग्रामीण इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं के साथ-साथ ज़मीन से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन भू-स्खलन और बारिश ने इन प्रयासों को बाधित किया है।

सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस बल पूरे समर्पण के साथ इस मुश्किल हालात में मोर्चा संभाले हुए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं जहां लापता लोगों के मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। थकावट, मौसम की मार और संसाधनों की सीमितता के बावजूद राहत कर्मी दिन-रात डटे हुए हैं।

स्थानीय प्रशासन की ओर से अस्थायी राहत शिविरों में भोजन, दवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। लेकिन जिन परिवारों के लोग अब भी लापता हैं, उनके लिए यह हर दिन एक अंतहीन प्रतीक्षा की तरह है। पूरे उत्तराखंड और देशभर से प्रार्थनाएं की जा रही हैं कि लापता लोगों का कोई सुराग जल्द मिले।

यह आपदा एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बसी बस्तियां किस कदर प्राकृतिक आपदाओं के ख़तरे में रहती हैं, और हमें किस तरह की मज़बूत योजना, सतर्कता और संसाधनों की ज़रूरत है ताकि इस तरह की त्रासदियों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

For more information, visit: https://youtu.be/9a8b1_-gbxQ

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