Uttarakhand

उत्तराखंड के मंदिरों में तय होगी श्रद्धालुओं की संख्या, कैंची धाम से शुरुआत

उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन का महत्व दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और इससे जुड़ी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। मंदिरों में लगातार बढ़ रही भीड़ ने सुरक्षा, सुविधा और दर्शन व्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों की "धारण क्षमता" यानी एक समय में कितने श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रह सकते हैं, इसका वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर आकलन किया जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत नैनीताल ज़िले में स्थित विश्वप्रसिद्ध कैंची धाम से हो चुकी है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, खासतौर पर बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन के लिए। पहले चरण के तहत यहां नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और अत्याधुनिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के ज़रिए श्रद्धालुओं की आवाजाही, मंदिर परिसर में भीड़ की स्थिति और दर्शन व्यवस्था की वास्तविक समय पर निगरानी की जा रही है।

पर्यटन विभाग की विशेष टीमें लगातार कैंची धाम में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य न सिर्फ आंकड़ों को इकट्ठा करना है, बल्कि इन आंकड़ों का विश्लेषण करके एक ऐसी रणनीति तैयार करना है, जिससे भविष्य में भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन दोनों प्रभावी ढंग से किए जा सकें। इसके अलावा इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी और मंदिरों में अवांछित घटनाओं की संभावना को भी कम किया जा सकेगा।

यह पहल उत्तराखंड सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें धार्मिक पर्यटन को न केवल बढ़ावा देना है बल्कि उसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-सम्मत भी बनाना है। आने वाले समय में इस मॉडल को केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री जैसे अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी लागू किया जाएगा।

For more information, visit: https://youtu.be/GOIjSyyXERQ

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